ज़िंदगी में मुस्कुराना आ जाता है,
जब अपनाना आ जाता है,
कि जो मिला, जैसा मिला,
क्या खूब मिला?
कि कभी-कभी टूट जाना भी ठीक है,
थोड़ा थक जाना भी ठीक है,
ये महसूस करवाता है कि ज़िंदगी है,
सब मिल जाने पर कुछ अधूरा रह जाने पर,
बतलाती है, कि सब हाथ में नहीं है,
बस तुम अपना बेहरारिन दे सकते थे,
जो जैसा है उसे वैसा अपनाना ही ज़िंदगी है,
भरी तालियों में उन आंखों की चमक को ढूंढना,
और मुस्कुरा कर खुद में मुस्कुरा लेना,
कभी सब मिल जाने पर,
खुद के गुरूर में न डूब जाना,
कभी गर्व न करना,
और दूसरों की खूबियों को देखना,
कब कौन कहाँ साथ खड़ा था,
हर पल खुद को याद दिलवाना,
हमें हमेशा सिर्फ़ खुद पर निर्भर रहना,
हमें हमेशा अपना बेहतरीन देना ही ज़िंदगी है ,
फिर भी दूसरों की क़दर करना,
लोग भूल जाएंगे, फिर भी प्यार करना ,
किसी के प्यार और किसी की दोस्ती का मान करना,
यूं थोड़ी रुकावटों में आह भरना,
फिर से मुस्कुरा उठना,
तुम तुम्हारे लिए ख़ास हो,
तुम तुम्हारी पसंदीदा हो,
हिम्मत करना,
यही ज़िंदगी है,
बस आज में ही ज़िंदगी है,
समेट लो, भर लो बाहों में कस कर,
ज़िंदगी खूबसूरत सी है!! 🌟

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