Wednesday, 8 April 2026

अस्तित्व!!

 


मैं हूँ मेरा अस्तित्व,

खुद से तराशा हुआ,

सब्र की आग में ढला,

मेहनत की रोशनी में सजा।


मैं स्वतंत्र हूँ,

संपूर्ण हूँ,

अपनी ही रचना का शिखर हूँ मैं।


मैं खूबसूरत हूँ—सिर्फ रूप से नहीं,

बल्कि अपने विचारों की गहराई से,

अपनी समझ की रोशनी से।


मैं बुद्धिमान हूँ,

आत्मनिर्भर हूँ,

अपनी दुनिया खुद संभालने वाली शक्ति हूँ।


मैं सबको थाम लेती हूँ,

पर खुद को कभी गिरने नहीं देती।


जो न समझे मेरे वजूद को,

मेरी कीमत, मेरी भावनाओं का महत्व—

उनके लिए दरवाज़े हमेशा खुले हैं,

जाने के लिए।


मैं किसी के प्यार या स्वीकृति की मोहताज नहीं,

मैं वहीं रुकती हूँ

जहाँ मुझे इज़्ज़त मिले,

जहाँ मेरी रूह को सुकून मिले।


मैं हूँ—पूरी, प्रबल और अपार,

और मुझे किसी की ज़रूरत नहीं,

मेरा अस्तित्व ही मेरी सबसे बड़ी ताकत है।

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